Husband Wife Heart Touching Story in Hindi | तलाकशुदा पति-पत्नी की कहानी

Husband Wife Heart Touching Story in Hindi: नमस्कार दोस्तों अक्सर हम गुस्से में कई बार किसी को गलत बोल देते हैं जिसके बाद हमें पछताना पड़ता है हमारी आज कि कहानी भी ऐसी ही स्थिति के बारे में है आज के पोस्ट में हमने Emotional Heart Touching Story Wife and Husband, Emotional Story of Husband and Wife, Husband Wife Love Story In Hindi, Husband wife heart touching story in hindi in english, तलाकशुदा पति-पत्नी की कहानी, मुझे तलाक नहीं चाहिए हिंदी कहानी, पति पत्नी का झगड़ा दिल छूनेवाली कहानी दिया है जो आपको पसंद आएगी

Husband Wife Heart Touching Story in Hindi
Husband Wife Heart Touching Story in Hindi

Husband Wife Heart Touching Story in Hindi | तलाकशुदा पति-पत्नी की कहानी

पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।

मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहीन समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता।

लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही।

मुकदमा दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया।

पति-पत्नी के हाथ में तलाक के काग़ज़ों की प्रति थी।
दोनों चुप थे, दोनों शांत, दोनों निर्विकार।

मुकदमा दो साल तक चला था।
अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक …………….
यह महज़ इत्तेफाक ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही टी-स्टॉल पर बैठे , कोल्ड ड्रिंक्स लिया।

यह भी महज़ इत्तेफाक ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे।
लकड़ी की बेंच और वो दोनों .
”कांग्रेच्यूलेशन …. आप जो चाहते थे वही हुआ ….” स्त्री ने कहा।
”तुम्हें भी बधाई ….. तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की ….” पुरुष बोला।
”तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है????” स्त्री ने पूछा।
”तुम बताओ?”
पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया, वो चुपचाप बैठी रही, फिर बोली, ”तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था….
अच्छा हुआ…. अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पीछा छूटा।”
”वो मेरी गलती थी, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था” पुरुष बोला।
”मैंने बहुत मानसिक तनाव झेली है”, स्त्री की आवाज़ सपाट थी न दुःख, न गुस्सा।
”जानता हूँ पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है… तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, ” पुरुष ने कहा।
स्त्री चुप रही, उसने एक बार पुरुष को देखा।

कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली और कहा, ”तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।”
”गलत कहा था”…. पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली।
कुछ देर चुप रही फिर बोली, ”मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं…”

प्लास्टिक के कप में चाय आ गई।
स्त्री ने चाय उठाई, चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी।
स्सी… की आवाज़ निकली।
पुरुष के गले में उसी क्षण ‘ओह’ की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था।
”तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?”
”ऐसा ही है कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,” स्त्री ने बात खत्म करनी चाही।
”तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।” पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी।
”तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है… फिर अटैक तो नहीं पड़े????” स्त्री ने पूछा।
”अस्थमा।डॉक्टर सूरी ने स्ट्रेन… मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, ” पुरुष ने जानकारी दी।
स्त्री ने पुरुष को देखा, देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो।
”इनहेलर तो लेते रहते हो न?” स्त्री ने पुरुष के चेहरे से नज़रें हटाईं और पूछा।
”हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, ” पुरुष ने कहा।
”तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है, ” स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा।
”हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ…” पुरुष कहते-कहते रुक गया।
”कुछ… कुछ तनाव के कारण,” स्त्री ने बात पूरी की।
पुरुष कुछ सोचता रहा, फिर बोला, ”तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।”

”हाँ… फिर?” स्त्री ने पूछा।
”वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी??? मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए….” स्त्री ने स्पष्ट किया।
”बिटिया बड़ी होगी… सौ खर्च होते हैं….” पुरुष ने कहा।
”वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,” स्त्री बोली।
”हाँ, ज़रूर दूँगा।”
”चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,” स्त्री ने कहा।

उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी।
पुरुष उसका चेहरा देखता रहा….
कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी।
स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ”कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे…
एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था… कितना अच्छा है… मैं ही खोट निकालती रही…”

पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ”कितना ध्यान रखती थी, स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती, सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था। हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी। कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।”

दोनों चुप थे, बेहद चुप।
दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश।
दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे….
”मुझे एक बात कहनी है, ” आवाज़ में झिझक थी।
”कहो, ” स्त्री नजल आँखों से उसे देखा।
”डरता हूँ,” पुरुष ने कहा।
”डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,” स्त्री ने कहा।
”तुम बहुत याद आती रही,” पुरुष बोला।
”तुम भी,” स्त्री ने कहा।
”मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।”
”मैं भी.” स्त्री ने कहा।
दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं।
दोनों की आवाज़ जज़्बाती और चेहरे मासूम।
”क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?” पुरुष ने पूछा।
”कौन-सा मोड़?”
”हम फिर से साथ-साथ रहने लगें… एक साथ… पति-पत्नी बन कर… बहुत अच्छे दोस्त बन कर।”
”ये पेपर?” स्त्री ने पूछा।
”फाड़ देते हैं।” पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के काग़ज़ात फाड़ दिए। फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो सिर्फ और सिर्फ पति-पत्नी का था ।।

👉कहानी से शिक्षा:- Moral of The Story

दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पति पत्नी में प्यार और तकरार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जरा सी बात पर कोई ऐसा फैसला न लें कि आपको जिंदगी भर अफसोस हो ।। आपको ये कहानी कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और पसंद आने पे शेयर जरूर करें!!

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Husband Wife Heart Touching Story in Hindi in English

pati ne patnii ko kisii baat par tiin thappad jad die, patnii ne isake javaab men apanaa sainḍil pati kii taraf phenkaa, sainḍil kaa ek siraa pati ke sir ko chhuutaa huaa nikal gayaa.

maamalaa raphaa-daphaa ho bhii jaataa, lekin pati ne ise apanii towhiin samajhii, rishtedaaron ne maamalaa owr pechiidaa banaa diyaa, n sirf pechiidaa balki sangiin, sab rishtedaaron ne ise khaanadaan kii naak kaṭanaa kahaa, yah bhii kahaa ki pati ko saiḍil maarane vaalii owrat n vaphaadaar hotii hai n pativrataa.

ladake ne ladakii ke baare men owr ladakii ne ladake ke baare men kaii asuvidhaajanak baaten kahii.

mukadamaa darj karaayaa gayaa. pati ne patnii kii charitrahiinataa kaa to patnii ne dahej utpiidan kaa maamalaa darj karaayaa. chhah saal tak shaadiishudaa jiivan biitaane owr ek bachchii ke maataa-pitaa hone ke baad aaj donon men talaak ho gayaa.

pati-patnii ke haath men talaak ke kaagazon kii prati thii.
donon chup the, donon shaant, donon nirvikaara.

mukadamaa do saal tak chalaa thaa.
amt men vahii huaa jo sab chaahate the yaanii talaak …………….
yah mahaz ittephaak hii thaa ki donon pakshon ke rishtedaar ek hii ṭii-sṭaal par baiṭhe , kolḍ ḍrinks liyaa.

yah bhii mahaz ittephaak hii thaa ki talaakashudaa pati-patnii ek hii mez ke aamane-saamane jaa baiṭhe.
lakadii kii bench owr vo donon .
”kaangrechyuuleshan …. aap jo chaahate the vahii huaa ….” strii ne kahaa.
”tumhen bhii badhaaii ….. tumane bhii to talaak de kar jiit haasil kii ….” purush bolaa.
”talaak kyaa jiit kaa pratiik hotaa hai????” strii ne puuchhaa.
”tum bataao?”
purush ke puuchhane par strii ne javaab nahiin diyaa, vo chupachaap baiṭhii rahii, phir bolii, ”tumane mujhe charitrahiin kahaa thaa….
achchhaa huaa…. ab tumhaaraa charitrahiin strii se piichhaa chhuuṭaa.”
”vo merii galatii thii, mujhe aisaa nahiin karanaa chaahie thaa” purush bolaa.
”mainne bahut maanasik tanaav jhelii hai”, strii kii aavaaz sapaaṭ thii n duahkh, n gussaa.
”jaanataa huun purush isii hathiyaar se strii par vaar karataa hai, jo strii ke man owr aatmaa ko lahuu-luhaan kar detaa hai… tum bahut ujjval ho. mujhe tumhaare baare men aisii gandii baat nahiin karanii chaahie thii. mujhe behad afasos hai, ” purush ne kahaa.
strii chup rahii, usane ek baar purush ko dekhaa.

kuchh pal chup rahane ke baad purush ne gaharii saans lii owr kahaa, ”tumane bhii to mujhe dahej kaa lobhii kahaa thaa.”
”galat kahaa thaa”…. purush kii oऱ dekhatii huii strii bolii.
kuchh der chup rahii phir bolii, ”main koii owr aarop lagaatii lekin main nahiin…”

plaasṭik ke kap men chaay aa gaii.
strii ne chaay uṭhaaii, chaay zaraa-sii chhalakii. garm chaay strii ke haath par girii.
ssii… kii aavaaz nikalii.
purush ke gale men usii kshaṇ ‘oha’ kii aavaaz nikalii. strii ne purush ko dekhaa. purush strii ko dekhe jaa rahaa thaa.
”tumhaaraa kamar dard kaisaa hai?”
”aisaa hii hai kabhii vovaraan to kabhii kaambiiphlem,” strii ne baat khatm karanii chaahii.
”tum eksarasaaij bhii to nahiin karatii.” purush ne kahaa to strii phiikii hansii hans dii.
”tumhaare asthamaa kii kyaa kanḍiishan hai… phir aṭaik to nahiin pade????” strii ne puuchhaa.
”asthamaa.ḍaakṭar suurii ne sṭrena… menṭal sṭres kam karane ko kahaa hai, ” purush ne jaanakaarii dii.
strii ne purush ko dekhaa, dekhatii rahii ekaṭaka. jaise purush ke chehare par chhape tanaav ko padh rahii ho.
”inahelar to lete rahate ho n?” strii ne purush ke chehare se nazaren haṭaaiin owr puuchhaa.
”haan, letaa rahataa huun. aaj laanaa yaad nahiin rahaa, ” purush ne kahaa.
”tabhii aaj tumhaarii saans ukhadii-ukhadii-sii hai, ” strii ne hamadard lahaje men kahaa.
”haan, kuchh is vajah se owr kuchha…” purush kahate-kahate ruk gayaa.

”kuchha… kuchh tanaav ke kaaraṇ,” strii ne baat puurii kii.
purush kuchh sochataa rahaa, phir bolaa, ”tumhen chaar laakh rupae dene hain owr chhah hazaar rupae mahiinaa bhii.”

”haan… phir?” strii ne puuchhaa.
”vasundharaa vaale phlaiṭ kii kiimat to biis laakh rupae hogii??? mujhe sirph chaar laakh rupae chaahie….” strii ne spashṭ kiyaa.
”biṭiyaa badii hogii… sow kharch hote hain….” purush ne kahaa.
”vo to tum chhah hazaar rupae mahiinaa mujhe dete rahoge,” strii bolii.
”haan, zaruur duungaa.”
”chaar laakh agar tumhaare paas nahiin hai to mujhe mat denaa,” strii ne kahaa.

usake svar men puraane sambandhon kii gard thii.
purush usakaa cheharaa dekhataa rahaa….
kitanii sahraday owr kitanii sundar lag rahii thii saamane baiṭhii strii jo kabhii usakii patnii huaa karatii thii.
strii purush ko dekh rahii thii owr soch rahii thii, ”kitanaa saral svabhaav kaa hai yah purush, jo kabhii usakaa pati huaa karataa thaa. kitanaa pyaar karataa thaa usase…
ek baar haridvaar men jab vah gangaa men snaan kar rahii thii to usake haath se janjiir chhuuṭ gaii. phir paagalon kii tarah vah bachaane chalaa aayaa thaa use. khud tairanaa nahiin aataa thaa laaṭ saahab ko owr mujhe bachaane kii koshishen karataa rahaa thaa… kitanaa achchhaa hai… main hii khoṭ nikaalatii rahii…”

purush ekaṭak strii ko dekh rahaa thaa owr soch rahaa thaa, ”kitanaa dhyaan rakhatii thii, sṭiim ke lie paanii ubaal kar jag men ḍaal detii. usake lie hameshaa inahelar khariid kar laatii, sereṭaaiḍ aakyuuhelar bahut mahangaa thaa. har mahiine kanjuusii karatii, paise bachaatii, owr aakyuuhelar khariid laatii. duusaron kii biimaarii kii kown paravaah karataa hai? ye karatii thii paravaah! kabhii jaahir bhii nahiin hone detii thii. kitanii samvedanaa thii isamen. main apanii mardaanagii ke nashe men rahaa. kaash, jo main isake jazbe ko samajh paataa.”

donon chup the, behad chupa.
duniyaa bhar kii aavaazon se mukt ho kar, khaamosha.
donon bhiigii aankhon se ek duusare ko dekhate rahe….
”mujhe ek baat kahanii hai, ” aavaaz men jhijhak thii.
”kaho, ” strii najal aankhon se use dekhaa.
”ḍarataa huun,” purush ne kahaa.
”ḍaro mata. ho sakataa hai tumhaarii baat mere man kii baat ho,” strii ne kahaa.
”tum bahut yaad aatii rahii,” purush bolaa.
”tum bhii,” strii ne kahaa.
”main tumhen ab bhii prem karataa huun.”
”main bhii.” strii ne kahaa.
donon kii aankhen kuchh zyaadaa hii sajal ho gaii thiin.
donon kii aavaaz jazbaatii owr chehare maasuuma.
”kyaa ham donon jiivan ko nayaa mod nahiin de sakate?” purush ne puuchhaa.
”kown-saa mod?”
”ham phir se saath-saath rahane lagen… ek saatha… pati-patnii ban kara… bahut achchhe dost ban kara.”
”ye pepar?” strii ne puuchhaa.
”phaad dete hain.” purush ne kahaa owऱ apane haath se talaak ke kaagazaat phaad die. phir strii ne bhii vahii kiyaa. donon uṭh khade hue. ek duusare ke haath men haath ḍaal kar muskaraae. donon pakshon ke rishtedaar hairaan-pareshaan the. donon pati-patnii haath men haath ḍaale ghar kii taraph chale gae. ghar jo sirph owr sirph pati-patnii kaa thaa ..

👉Kahani se Shiksha:- Moral of the Story

doston is kahaanii se hamen yah shikshaa milatii hai ki pati patnii men pyaar owr takaraar ek hii sikke ke do pahaluu hain jaraa sii baat par koii aisaa phaisalaa n len ki aapako jindagii bhar aphasos ho .. aapako ye kahaanii kaisii lagii hamen kamenṭ baaks men jaruur bataaye owr pasand aane pe sheyar jaruur karen!

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